भगवान जगन्नाथ हुए बीमार, इलाज शुरू....सुबह शाम औषधी, काढ़ा और दवा का भोग
प्रयागराज। उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में वर्षों पुरानी चली आ रही पौराणिक परंपराओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। भीषण गर्मी से भगवान जगन्नाथ बीमार हैं और उनका इलाज शुरू हो चुका है। सुबह शाम औषधी काढ़ा और दवा का भोग लगाया जा रहा है।
रूटीन में उनके ब्लड प्रेशर आदि की जांच हो रही है। भगवान 25 जून तक के लिए एकांतवाश में चले गए। यह सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन मान्यताओं के अनुसार, यहां के लोग इसका पालन करते हैं।
दरअसल, भगवान जगन्नाथ को स्नान कराने वाले दिवस को देव पूर्णिमा स्नान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जगन्नाथ पुरी धाम मंदिर में पूर्ण विधि के अनुसार भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र एवं देवी सुभद्रा को स्नान करने के लिए मंदिर परिसर के अंदर स्थित कुएं से पानी लाया जाता है।
जिसे स्वर्ण कुंआ के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर परिसर के उत्तरी प्रवेश द्वार के पास माता शीतला मंदिर के बगल में स्थित है। जगन्नाथ देवी सुभद्रा एवं बलभद्र को स्नान करने के लिए 108 घड़ों का प्रयोग किया जाता है और प्रत्येक खड़े के जाल में केसर, कपूर, चंदन का लेप, जड़ी बूटियां और और सुगंधित पदार्थ मिलाए जाते हैं। प्रत्येक खड़े को एक नए कपड़े में लपेटा जाता है और घड़े के मुंह को नारियल से ढंक दिया जाता है।
स्नान के समय भगवान जगन्नाथ जी को 35 बलभद्र जी को 33, देवी सुभद्रा को 22 और भगवान जगन्नाथ जी के सुदर्शन चक्र पर 18 घड़ों से भरे हुए जल से स्नान कराया जाता है। स्नान के उपरांत भगवान जगन्नाथ जी जोर से पीड़ित होते हैं और 14 दिनों के लिए विश्रामगृह में चले जाते हैं जिसे हम विश्राम यात्रा के रूप में जानते हैं।
यह यात्रा जगन्नाथ जी महोत्सव समिति ट्रस्ट के द्वारा आयोजित होती है।

भारत-पाक के बीच परमाणु ठिकानों की लिस्ट का आदान-प्रदान, समझौते के तहत हुई प्रक्रिया
उस्मान ख्वाजा का संन्यास? पांचवें एशेज टेस्ट से पहले तोड़ सकते हैं चुप्पी