जिला शिवपुरी, मध्य प्रदेश।
बारिश का मौसम चल रहा है और खेतों में बुवाई का समय है, लेकिन जिले के हजारों किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सरकारी गोदामों और सहकारी समितियों पर खाद की भारी किल्लत देखने को मिल रही है।

किसानों का कहना है कि वे सुबह 4-5 बजे से लाइन में लग जाते हैं, लेकिन दोपहर तक खाली हाथ लौटना पड़ता है। कुछ स्थानों पर पुलिस बल की मौजूदगी में वितरण किया जा रहा है, तो कहीं खाद की कालाबाज़ारी खुलेआम हो रही है।

किसानों का आरोप – "खाद को ब्लैक में बेचा जा रहा"

कई किसानों ने बताया कि उन्हें 266 रुपये की डीएपी की बोरी 300 से 400 रुपये तक में बेची जा रही है, वह भी चुपचाप, गुपचुप तरीके से। सरकारी आंकड़ों में खाद पर्याप्त बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है।

"फसल नहीं बोई तो परिवार भूखा रहेगा" – किसानों की पीड़ा

एक किसान ने बताया, "अगर समय पर खाद नहीं मिली तो पूरी फसल चौपट हो जाएगी। सरकार को चाहिए कि खाद वितरण पर निगरानी बढ़ाए, नहीं तो किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।"

प्रशासन मौन, किसान परेशान

जिला प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अधिकारी केवल आंकड़ों में उलझे हुए हैं, जबकि खेतों में किसान का पसीना सूखता जा रहा है।


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सवाल उठता है —

क्या सरकार और प्रशासन को किसानों की तकलीफें दिखाई नहीं देतीं?

हर बार किसानों को ही क्यों झेलना पड़ता है संकट?

चुनाव के वक्त किए गए वादे अब कहां हैं?

रिपोर्टर: दीपक रावत
प्रकाशन तिथि: 06 अगस्त 2025
स्थान: शिवपुरी, मध्य प्रदेश